Sunday, 17 June 2018

मायावती विपक्षी एकजुटता से अलग क्‍या अकेले चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं?

नई दिल्‍ली: 23 मई को कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी एकजुटता के तहत कई नेता दिखाई दिए. एक तरफ जहां बीएसपी नेता मायावती और सपा नेता अखिलेश यादव एक मंच पर दिखे तो दूसरी तरफ सोनिया गांधी के साथ बसपा सुप्रीमो की अलग ही कैमिस्‍ट्री देखने को मिली. उसके बाद से ही कहा जाने लगा कि 2019 के चुनावों के लिहाज से बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी एकजुटता परवान चढ़ रही है. लेकिन अब इसी साल के अंत में मध्‍य प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कहा जा रहा है कि वहां कांग्रेस और बीएसपी का गठबंधन नहीं होगा.

मध्‍य प्रदेश में गठबंधन नहीं
मध्य प्रदेश बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने रविवार को कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर झूठा प्रचार कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस झूठे प्रचार से उनकी पार्टी को नुकसान हो रहा है. बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में बीएसपी 50 से 55 सीटें जीतेगी. उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस नेता जनता के बीच जाकर कह रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी के साथ गठबंधन के लिए कांग्रेस की बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन के विषय में राज्य स्तर पर हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है. जहां तक मुझे पता है कि केंद्रीय स्तर पर भी कोई बातचीत नहीं हो रही है. अहिरवार का बयान ऐसे वक्‍त आया है जब उससे चंद रोज पहले कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी में बीएसपी के वरिष्‍ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा उपस्थित हुए थे.


2013 के विधानसभा चुनावों में मध्‍य प्रदेश की 230 सीटों में से कांग्रेस और बीएसपी को क्रमश: 36.38% और 6.29% वोट मिले थे. सत्‍ताधारी बीजेपी को 44.88 प्रतिशत वोट मिले थे. इस तरह बीजेपी को 165 सीटें, कांग्रेस को 58, बीएसपी को 4 और निर्दलीयों को तीन सीटों पर कामयाबी मिली थी.

सूत्रों के मुताबिक मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के साथ बीएसपी के गठबंधन नहीं होने का कारण यह माना जा रहा है कि दरअसल बीएसपी इस तरह कांग्रेस के साथ राज्‍यवार गठबंधन के पक्ष में नहीं है. वह जिन राज्‍यों में कमजोर है, वहां भी कांग्रेस के साथ सौदेबाजी कर गठबंधन के तहत चुनाव लड़ना चाहती है. इसका सीधा सा मतलब अधिक सीटों पर कामयाबी हासिल करना है.

Source:-ZEENEWS

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