केंद्रीय
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री
धर्मेन्द्र प्रधान ने निवेशकों को भारत की विकास गाथा में भागीदार बनने और
उसका लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। सोमवार को आबु धाबी में डिस्कवर्ड
स्मॉल फील्ड-II
बोलियों के लिए रोड शो के दौरान उन्होंने कहा की पिछले चार वर्षों में,
हमने तेल और गैस के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, परन्तु
सर्वोत्कृष्ट प्राप्त करना बाकी हैं। उन्होंने कहा की कोई राष्ट्र,
अंतर्राष्ट्रीय संगठन या कंपनी साझेदारी और सहयोग के बिना प्रगति नही कर
सकती।
श्री
प्रधान ने कहा की भारत आज विश्व में तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक तौर पर ऊर्जा की मांग सबसे अधिक भारत में बढ़ने की
संभावना है। उन्होंने कहा की वर्तमान में भारत की तेल और गैस की मांग 22.9
करोड़ मैट्रिक टन की है जो 2040 में तीन गुना बढ़कर 60.7 करोड़ मैट्रिक टन
बढ़ जायेगी। उन्होंने कहा की भारत में अपस्ट्रीम तेल और गैस क्षेत्र में
निवेश की अनेक उज्जवल संभावनाएं हैं।
मंत्री
ने कहा की भारत सरकार ने देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए
नीतिगत फ्रेमवर्क को दुरूस्त किया है जिसमें समूची ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को
कवर किया गया है। उन्होंने कहा की भारतीय क्षेत्र में खोज के लिए निवेश
आकर्षित करने के लिए हाइड्रोकार्बन खोज और लाइसेंस नीति और खोजे गए लघु
क्षेत्रों संबधी नीति की दिशा में प्रगतिशील उपाय किये गए हैं।
श्री
प्रधान ने कहा की सरकार ने कई तरह के अन्य नीतिगत सुधार भी किये है,
जिनमें कोयला क्षेत्र मीथेन नीति, परिपक्व क्षेत्र से तेल और गैस का
उत्पादन बढ़ाने के उपाय आदि शामिल हैं।
मंत्री
ने कहा की भारत गैस आधारित स्वच्छ अर्थव्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता
देता है। वर्तमान में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी हमारी समग्र ऊर्जा में
अपेक्षाकृत कम हैं। उन्होंने कहा की देश में 8 अरब अमरीकी डॉलर से अधिक की
गैस ढांचा परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही है। उन्होंने कहा की 2022 तक
हमारा लक्ष्य ऊर्जा साधनों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी वर्तमान 6.5
प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत पर ले जाने का है। उन्होंने कहा कि भारत एक
मजबूत प्राकृतिक गैस व्यापार केंद्र कायम करने का इच्छुक हैं।
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