Thursday, 31 May 2018

कैराना में विपक्ष ने बनाया था ये 'खास प्‍लान', जिसके चलते यहां फेल हो गई भाजपा

नई दिल्ली : चार लोकसभा सीटों के लिए हुए उपचुनावों में भले भाजपा और उसके सहयोगी दल ने दो सीटें अपने नाम कर ली हों, लेकिन यूपी के कैराना में मिली हार उसके लिए किसी गहरे जख्म से कम नहीं है. ये सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न थी. इसलिए सभी की नजरें बाकी सभी जगह की मुकाबले कैराना पर ज्यादा थीं. यहां एक तरफ भाजपा की उम्मीदवार मृगांका सिंह थीं, दूसरी तरफ पूरे विपक्ष ने राष्ट्रीय लोकदल की तबस्सुम हसन पर दांव लगाया था. ये पहले से तय था कि हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई कैराना सीट भाजपा के लिए इस बार आसान नहीं होगी. हुआ भी वही, यहां से विपक्ष की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को जीत मिली.

इस जीत ने विपक्ष को एक बार फिर से भाजपा के खिलाफ लामबंद होने का बड़ा कारण दे दिया है. उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां जातियों का गठजोड़ बहुत अहम होता है, वहां आने वाले चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होने वाले. कैराना में विपक्ष ने जातियों के गठजोड़ को बहुत आसानी से अपनी ओर कर लिया. वहीं भाजपा सत्ता में होने के बावजूद इस मैनेजमेंट में फेल हो गई. इस चुनाव में तीन जातियां सबसे अहम थीं. जाट, मुस्लिम और दलित. विपक्ष ने सधी रणनीति के दम पर इन्हें साध लिया.

विपक्ष ने ऐसे साधा जाटोंं, मुस्लिमों और दलितों को
1. कैराना में जाट और मुस्लिम समुदाय हमेशा से राष्ट्रीय लोकदल के साथ रहे. लेकिन पिछले चुनावों में जाट छिटककर भाजपा के साथ हो गए. मुस्लिम वोटर भले भाजपा के साथ न हों लेकिन जाट और दूसरी जातियों के वोट पाकर भाजपा यहां जीत गई. इस चुनावों में अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी जाटों को फिर से अपनी ओर करने में कामयाब रहे. यही कारण रहा कि जाट बहुल गांवों के साथ दंगा प्रभावित गांवों में भी जाट वोटर भाजपा के मुकाबले रालोद के साथ खड़े नजर आए.

2. चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत का गांव-गांव और घर घर जाना भी टर्निंग प्वाइंट रहा. उन्होंने अपने सीधे संपर्क से एक बार फिर से लोगों को अपने पाले में करने कामयाबी पाई. इसके अलावा उन्होंने गन्ने के मुद्दे को छुआ, जो पहले ही यहां बड़ा मुद्दा बना हुआ था. यहां तक कि यहां पर मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान तबस्सुम हसन के बेटे नाहिद हसन के बयानों को भी भाजपा ने याद दिलाया, लेकिन वह दांव भी काम नहीं किया.

3. आमतौर पर दलित भी भाजपा को कम वोट देते हैं, लेकिन 2014 के चुनावों में भाजपा ने दलित वोटों का बड़ा हिस्सा अपने पाले में किया था. लेकिन इन चुनावों में दलितों की नाराजगी भी उसे उठानी पड़ी. सहारनपुर के शब्बीरपुर कांड और 2 अप्रैल को आरक्षण आंदोलन में दलितों के खिलाफ दर्ज मुकद्मों से भी इस वर्ग में रोष था. बसपा के उम्मीदवार के न होने से दलित वोट तबस्सुम हसन के खाते में गए.

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यूपी और बिहार को छोड़कर सब जगह सत्ताधारी पार्टियों का जलवा बरकरार

नई दिल्ली: देश में चार लोकसभा सीटों और 10 राज्यों की 11 विधानसभा सीटों के अंतिम रुझान दिखाते हैं कि अगर उत्तर प्रदेश और बिहार को छोड़ दें तो बाकी राज्यों में उपचुनाव राज्य में सत्ताधारी पार्टी के हक में ही गए हैं. उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव में नतीजे सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ गए हैं. कैराना में राष्ट्रीय लोक दल प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने बीजेपी प्रत्याशी मृगांका सिंह को बड़े अंतर से हराते दिख रही हैं. इसी तरह नूरपुर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने बीजेपी प्रत्याशी को बड़े अंतर से पीछे कर दिया. विपक्ष ने ये दोनों सीटें बीजेपी से छीनता दिख रहा है. यूपी में सारे विपक्ष के एक साथ आने के बाद बीजेपी के लिए यह दूसरा बड़ा झटका होगा.

महाराष्ट्र में दो लोकसभा सीटों भंडारा-गोंदिया और पालघर के लिए उपचुनाव हुआ. ये दोनों सीटें पहले बीजेपी की पास थीं. भंडारा-गोंदिया सीट बीजेपी सांसद के इस्तीफे तो पालघर सीट बीजेपी सांसद की मृत्यु के कारण खाली हुई थी. अंतिम रुझान मिलने तक दोनों सीटों पर सत्ताधारी बीजेपी आगे थी. हालांकि भंडारा-गोंदिया में कांटे की टक्कर है.

झारखंड में दो विधानसभा सीटों गोमिया और सिल्ली के लिए उपचुनाव हो रहा है. यह दोनों सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास थीं. कानूनी मामलों में फंसने के कारण इन दोनों सीटों के विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था. उपचुनाव में सत्ताधारी बीजेपी गोमिया सीट जेएमएम से छीनती दिख रही है, जबकि सिल्ली पर जेएमएम का कब्जा बरकरार रह सकता है.

पंजाब की शाहकोट विधानसभा सीट अकाली दल के विधायक के निधन के बाद खाली हो गई थी. उपचुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस यह सीट अकाली दल से छीनती नजर आ रही है.

केरल की चेनग्नूर विधानसभा सीट सत्ताधारी लेफ्टफ्रंट की प्रमुख पार्टी सीपीएम के पास थी. विधायक के निधन के कारण खाली हुई इस सीट पर सत्ताधारी पार्टी कब्जा बरकरार रखने की ओर है.

कर्नाटक की राजराजेश्वरीनगर विधानसभा सीट पर कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय मतदान नहीं हुआ था. इस पर अब हुए मतदान में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी  जीत के करीब है.

पश्चिम बंगाल की महेशताला विधानसभा सीट सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के पास थी. पार्टी विधायक के निधन के कारण खाली हुई इस सीट पर टीएमसी ने अपना कब्जा बरकरार रखा है.

नगालैंड राज्य की इकलौती नगालैंड लोकसभा सीट पर उपचुनाव यहां के सांसद निफ्यू रिओ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जरूरी हुआ. इस सीट से सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) और कांग्रेस समर्थित एनपीएफ के बीच कांटे की टक्कर है.

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Friday, 25 May 2018

भारत को दहलाने की आतंकी साजिश नाकाम, सुरक्षाबलों ने बरामद की ये खास हाईटेक सीढ़ी

खालिद हुसैन, श्रीनगर: भारत में आतंकियों के घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया है. जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में गुरुवार को घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों पर सुरक्षाबलों ने हमला कर दिया. हमले के बाद आतंकी भाग गए लेकिन उनका सामान वहीं छूट गया. सुरक्षाबलों ने सारा सामान जब्त कर लिया है. बरामद हुए सामान में खाने-पीने के सामान से लेकर गोला-बारूद शामिल है. सामान में एक फोल्ड होने वाली सीढ़ी भी मिली है. इस सीढ़ी का एक वीडियो जारी किया गया है. 

सुरक्षाबलों द्वारा बरामद किए गए सामान में भारी मात्रा में गोलियां और मैग्जीन मिले हैं. इसके अलावा खाने का सानान, रोटियां, बिस्कुट, ज्यूस, पानी की बोतलें, चिप्स, कपड़े, दाढ़ी बनाने का सामान, बैग, दूरबीन, वॉकी टॉकी, मोबाइल कनेक्टर, बेंत की लाठी आदि सामान मिले हैं.   

शेयर किए गए सीढ़ी के वीडियो में सुरक्षाबलों ने सीढ़ी को फोल्ड करते हुए दिखाया है. वीडियो में दिखाए अनुसार सीढ़ी पूरी फोल्ड हो जाए तो इतनी छोटी हो जाती है कि उसे बैग में भी रखा जा सकता है. जानकारी के मुताबिक, आतंकी इस सीढ़ी का इस्तेमाल छोटी पहाड़ियों को तेजी से पार करने के लिए करते हैं. 

बरामद हुई सीढ़ी की लंबाई कम से कम 15-20 फुटी उंची होगी. कम वजन, मजबूती, ले जाने में आसान और फोल्डेबल होने के कारण इन सीढ़ियों का इस्तेमाल घुसपैठ के दौरान आसानी से किया जा सकता है.

कल (गुरुवार को) आतंकियों द्वारा घुसपैठ की कोशिश के दौरान सेना ने उनपर हमला कर दिया. ऐसे में आतंकी वहां से भाग गए लेकिन उनका सामान छूट गया. आपको बता दें कि पिछले दिनों पठानकोट में कुछ संदिग्धों को देखा गया था. इसके बाद से ही पठानकोट के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था.   

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Wednesday, 23 May 2018

डेवलपर ने दिया है धोखा तो मोदी सरकार लौटाएगी आपके चेहरे की मुस्कान

नई दिल्ली : फ्लैट की बुकिंग कराने और कई साल तक किश्तों का भुगतान करने के बाद भी अगर आपको फ्लैट का पजेशन नहीं मिला है तो यह खबर आपके लिए है. इस खबर को पढ़कर आपको राहत जरूर मिलेगी. सरकार ने आशियाने की बुकिंग कराने वाले हजारों खरीदारों को नुकसान से बचाने के लिए 16 महीने पुराने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में संशोधन के लिए बुधवार को अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत बिल्डर कंपनी अगर दिवालिया होती है तो खरीदार का पूरा पैसा नहीं डूबेगा.

14 सदस्यीय समिति ने दिया सुझाव
प्रस्तावित अध्यादेश में फ्लैट बायर्स को बैंकों की तरह ही 'वित्तीय कर्जदाता' माना गया है. ऐसे में बिल्डर के दिवालिया होने पर नीलाम होने वाली उसकी प्रॉपर्टी में बायर को भी हिस्सा मिलेगा. आईबीसी कानून में संशोधन का प्रस्ताव नई धारा 29A को जोड़ने के एक महीने बाद आया है. पिछले साल नवंबर में आईबीसी में संभावित बोलीदाताओं की अयोग्यता को लेकर नए मानदंड जोड़े गए थे. यह संशोधन सरकार की तरफ से इस संबंध में सिफारिशें देने के लिये गठित 14 सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है.

सुप्रीम कोर्ट में दी थी याचिका
मौजूदा नियम के अनुसार फ्लैट खरीदने वालों को बिल्डर की कंपनी में हिस्सेदार नहीं माना जाता. ऐसे में बिल्डर के दिवालिया होने पर उसकी प्रॉपर्टी के नीलाम होने पर बैंकों और अन्य कर्जदारों का हक होता है. पिछले दिनों जेपी ग्रुप और आम्रपाली बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने पर यह समस्या सामने आई थी. कुछ खरीदारों ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. आईबीसी में संशोधन वाले प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जैसे ही मंजूरी देंगे दिवाला प्रक्रिया का सामना कर रहे जेपी इंफ्राटेक जैसी कंपनियों के प्रोजेक्ट में घर खरीदारों की ताकत बढ़ जाएगी.

राष्ट्रपति के मंजूदी देने का इंतजार
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, 'यह नया विधेयक है...मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी.' उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए विधेयक का ब्योरा देने से इनकार किया. मंत्रिमंडल ने समिति की सिफारिशों के अनुरूप मकान खरीदारों को राहत पहुंचाने के लिये क्या कुछ उपायों को मंजूरी दी है? इस सवाल के जवाब में प्रसाद ने कहा, 'कोई भी अध्यादेश जब तक राष्ट्रपति मंजूरी नहीं देते हैं, इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा जा सकता है.

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Friday, 18 May 2018

बेंगलुरु के शंगरीला होटल लाए गए बीजेपी विधायक, येदियुरप्‍पा बोले- '5 बजे के बाद जश्‍न होगा

नई दिल्ली/बेंगलुरु: कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को राज्य विधानसभा में आज शाम 4 बजे अपना बहुमत साबित करना है. बीजेपी के बहुमत साबित करने से पहले प्रदेश की राजनीति का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. फ्लोर टेस्‍ट से पहले येदियुरप्पा ने बेंगलुरु में विधायकों के साथ बैठक की, जिसके बाद उन्‍होंने मीडिया से कहा, 'हम विधानसभा में बहुमत साबित करने पर पूरा भरोसा है. शाम 5 बजे जश्‍न होगा.'

उच्चतम न्यायालय ने बीते शुक्रवार (18 मई) को यह आदेश सुनाया था. शीर्ष अदालत ने येदियुरप्पा को फ्लोर टेस्‍ट के लिए राज्यपाल द्वारा दी गई 15 दिन की समयसीमा को घटाते हुए यह व्यवस्था दी. विपक्षी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के विधायकों द्वारा दलबदल, इस्तीफा देने या मतदान से दूर रहने की स्थिति को छोड़ दें तो बहुमत साबित करने के लिए आंकड़े बीजेपी के पक्ष में नजर नहीं आते. हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और उसके पास 104 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 78 तथा जेडीएस के पास 37 सीटें हैं. तीन सीटें निर्दलीय को मिली हैं. 224 सदस्यीय विधानसभा में मतदान 222 सीटों पर हुआ था. दोनों ही खेमों ने आंकड़े अपने पक्ष में होने का भरोसा जताया है.

उधर, राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा बीजेपी विधायक केजी बोपैया को अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) नियुक्त करने को लेकर एक और कानूनी लड़ाई की संभावना पैदा हो गई है. आमतौर पर विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य को अस्थायी अध्यक्ष बनाया जाता है और इस प्रकार कांग्रेस के आर वी देशपांडे इस पद के लिए योग्य हैं.

येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने का भरोसा
17 मई की सुबह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले लिंगायत नेता येदियुरप्पा (75) ने कहा कि वह राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करने को लेकर ‘‘100 प्रतिशत’’ आश्वस्त हैं. शीर्ष अदालत के आदेश के तुरंत बाद येदियुरप्पा ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा, ‘हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे बहुमत साबित करने के लिए हमारे पास 100 प्रतिशत सहयोग एवं समर्थन है.’ येदियुरप्पा ने कहा, ‘‘इस सब राजनीतिक खेल के बीच, हम कल बहुमत साबित करेंगे. हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे.’’

विधानसभा परिसर की सुरक्षा तय करने का भी निर्देश
पीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह विधानसभा परिसर के आसपास समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें. पीठ ने कहा कि राज्यपाल को सौंपे गये येदियुरप्पा के पत्रों की संवैधानिक वैधता के सवाल पर बाद में विचार किया जाएगा. न्यायालय ने कहा कि अंतत: बहुमत तो सदन में ही साबित करना होगा और इसीलिये कल (शनिवार, 19 मई) शाम चार बजे शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दिया गया है.

मुकुल रोहतगी ने शक्ति परीक्षण के लिए मांगा था 21 मई तक का समय
इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सोमवार (21 मई) तक का वक्त मांगा था, लेकिन पीठ ने शक्ति परीक्षण कल (शनिवार, 19 मई) करने का आदेश दिया. येदियुरप्पा ने शक्ति परीक्षण गुप्त मतदान के माध्यम से कराने का पीठ से अनुरोध किया जिसे न्यायाधीशों ने अस्वीकार कर दिया.

Source:-Zeenews

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