उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपी बीजेपी विधायक के खिलाफ 260 दिन बाद केस दर्ज होने के बाद यूपी सरकार ने सीबीआई जांच का फैसला किया है. इस केस की जांच अब सीबीआई के हवाले कर दी गई है. इससे पहले कल हुई एसआईटी जांच पर पुलिस, प्रशासन और अस्पताल स्तर पर बड़ी लापरवाही सामने आई है. लेकिन आरोपी विधायक की गिरफ्तारी के सवाल पर यूपी के डीजीपी ओपी सिंह कहा कहना है कि वह अभी सिर्फ आरोपी हैं. उनके गिरफ्तारी का फैसला सीबीआई करेगी.
एसआईटी जांच में निम्नलिखित बातें सामने आई हैं...
4 जून 2017: पीड़िता को आरोप है कि इस दिन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया.
11 जून 2017: पीड़िता अपने घर से गायब हो गई
12 जून 2017: उसकी मां ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को औरेया से बरामद किया. इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया. जज के सामने धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया गया.
1 अगस्त 2017: उन्नाव पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी. इसके बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया.
30 जून 2017: पीड़िता के चाचा उसे लेकर दिल्ली गए. वहां पीड़िता ने अपनी चाची को इस घटना के बारे में बताया.
17 अगस्त 2017: उन्नाव वापस आकर पहली बार पीड़िता ने गैंगरेप से संबंधित तहरीर थाने में दी. पुलिस ने जांच के बाद जज के सामने धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया. इस बयान में पीड़िता ने आरोपी विधायक का नाम नहीं लिया था.
3 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता से साथ मारपीट की गई. जेल में पेट दर्द की शिकायत और खून की उल्टियां करने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. इसके बाद डीआईजी जेल लव कुमार और डीएम उन्नाव के इस मामले की जांच सौंपी गई.
चार आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
इधर, इंसाफ नहीं मिलने पर पीड़िता ने लखनऊ स्थित सीएम आवास पर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन उसे बचा लिया गया. इस मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस और प्रशासन तेज हो गया. उन्नाव पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि के निर्देश पर इस मामले के चार नामजद अभियुक्तों सोनू, बउवा, विनीत और शैलू को गिरफ्तार कर लिया गया. वहीं, माखी के थाना प्रभारी अशोक कुमार समेत छह पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलम्बित कर दिया गया. जांच के लिए एसआईटी गठित की गई.
Source:-Aajtak
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एसआईटी जांच में निम्नलिखित बातें सामने आई हैं...
4 जून 2017: पीड़िता को आरोप है कि इस दिन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया.
11 जून 2017: पीड़िता अपने घर से गायब हो गई
12 जून 2017: उसकी मां ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को औरेया से बरामद किया. इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया. जज के सामने धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया गया.
1 अगस्त 2017: उन्नाव पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी. इसके बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया.
30 जून 2017: पीड़िता के चाचा उसे लेकर दिल्ली गए. वहां पीड़िता ने अपनी चाची को इस घटना के बारे में बताया.
17 अगस्त 2017: उन्नाव वापस आकर पहली बार पीड़िता ने गैंगरेप से संबंधित तहरीर थाने में दी. पुलिस ने जांच के बाद जज के सामने धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया. इस बयान में पीड़िता ने आरोपी विधायक का नाम नहीं लिया था.
3 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता से साथ मारपीट की गई. जेल में पेट दर्द की शिकायत और खून की उल्टियां करने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. इसके बाद डीआईजी जेल लव कुमार और डीएम उन्नाव के इस मामले की जांच सौंपी गई.
चार आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
इधर, इंसाफ नहीं मिलने पर पीड़िता ने लखनऊ स्थित सीएम आवास पर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन उसे बचा लिया गया. इस मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस और प्रशासन तेज हो गया. उन्नाव पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि के निर्देश पर इस मामले के चार नामजद अभियुक्तों सोनू, बउवा, विनीत और शैलू को गिरफ्तार कर लिया गया. वहीं, माखी के थाना प्रभारी अशोक कुमार समेत छह पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलम्बित कर दिया गया. जांच के लिए एसआईटी गठित की गई.
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