उत्तर प्रदेश के बंदायूं में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के रंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया. जिसे भगवा कर दिया गया था. बदायूं के कुंवरगांव में कुछ शरारती लोगों ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया था जिसे दोबारा स्थापित किया गया. लेकिन इस बार नई प्रतिमा नीले रंग की जगह भगवा रंग की लगाई गई. अंबेडकर के कपड़ों को भगवा रंग का दिखाया गया. विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद अब फिर अंबेडकर की प्रतिमा को नीले रंग में रंग दिया गया है.
भगवाकरण की राजनीति!
योगी सरकार ने सत्ता का श्रीगणेश करते ही भगवा रंग का जैसे तूफान ला दिया है. थाने भगवा, नेम प्लेट भगवा, इमारत का रंग भगवा और हज हाउस से लेकर नगरपालिका तक सब भगवा. अब अंबेडकर भी भगवा हो चले हैं लेकिन सरकार चला रही पार्टी के पास रंग के नए राजपाट पर दलीलें कम नहीं हैं.
अंबेडकर के नाम पर दलितों के उत्थान पर देश में सियासी बहस जोर पकड़ रही है. होड़ इस बात कि है कि अंबेडकर को ज्यादा सम्मान किसने दिया और अब भगवा अंबेडकर पर नया घमासान सामने हैं.
विवाद बढ़ने पर यूपी राज्यपाल राम नाइक ने कहा था कि मैं एक मराठी हूं, बाबा साहेब भी मराठी थे. हिंदी भाषी राज्य आजतक उनका नाम गलत तरीके से लिखते थे, जिसे मैंने ठीक करवाया है. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि बाबा साहेब जो अपने हस्ताक्षर करते थे, उसमें भीमराव रामजी अंबेडकर ही लिखते थे. ऐसे में कुछ भी गलत नहीं है. यही नहीं, राम नाइक ने इसको लेकर 2017 में एक कैंपेन चलाया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा था.
Source:-Aajtak
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भगवाकरण की राजनीति!
योगी सरकार ने सत्ता का श्रीगणेश करते ही भगवा रंग का जैसे तूफान ला दिया है. थाने भगवा, नेम प्लेट भगवा, इमारत का रंग भगवा और हज हाउस से लेकर नगरपालिका तक सब भगवा. अब अंबेडकर भी भगवा हो चले हैं लेकिन सरकार चला रही पार्टी के पास रंग के नए राजपाट पर दलीलें कम नहीं हैं.
अंबेडकर के नाम पर दलितों के उत्थान पर देश में सियासी बहस जोर पकड़ रही है. होड़ इस बात कि है कि अंबेडकर को ज्यादा सम्मान किसने दिया और अब भगवा अंबेडकर पर नया घमासान सामने हैं.
विवाद बढ़ने पर यूपी राज्यपाल राम नाइक ने कहा था कि मैं एक मराठी हूं, बाबा साहेब भी मराठी थे. हिंदी भाषी राज्य आजतक उनका नाम गलत तरीके से लिखते थे, जिसे मैंने ठीक करवाया है. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि बाबा साहेब जो अपने हस्ताक्षर करते थे, उसमें भीमराव रामजी अंबेडकर ही लिखते थे. ऐसे में कुछ भी गलत नहीं है. यही नहीं, राम नाइक ने इसको लेकर 2017 में एक कैंपेन चलाया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा था.
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